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Sunday, April 8, 2018

Warren Buffett Biography in hindi | वारेन बुफेट का जीवन परिचय

Warren Buffett Biography in hindi | वारेन बफे  का जीवन परिचय। .. 


' असाधारण परिणाम पाने के लिए असाधारण चीजे करना जरुरी नहीं है। '
- वारेन बफे 

वारेन बफे का जन्म 1930 में अमेरिका में हुआ था ,वारेन बफे ने बचपन में ही मेहनत और मितव्ययिता के सबक सीख लिए थे। वे बचपन से ही पैसे कमाने लगे थे। वे घर घर जाकर च्युंगम ,कोका -कोला और साप्ताहिक पत्रिकाएँ बेचते थे। कुछ समय तक उन्होंने अपने दादा जी के किराना स्टोर में भी काम किया। अखबार बांटने के अलावा वे सोडा पॉप बेचने और पिन बाल मशीन लगाने जैसे कई दूसरे धंधे भी करते थे। उनके व्यावसायिक प्रयत्नों से उन्हें नियमित आमदनी होती थी ,जिसका वे दुबारा निवेश करके नये व्यवसाय शुरू करते थे। हाईस्कूल में पढ़ते वक्त वांरेन बफे ने एक मित्र के साथ एक पिनबॉल मशीन खरीदी। उससे हुई कमाई से उन्होंने नई मशीन खरीदी और इस तरह उन्होंने आठ मशीने कर ली। जब उन्होंने अपना कारोबार बेचा ,तो मिलने वाले पैसो से उन्होंने नया बिजनेस शुरू किया। इस तरह 26 बर्ष की उम्र तक उन्होंने 174000 डॉलर इकट्ठे कर लिए थे। 
उल्लेखनी बात यह है की मात्र 14 बर्ष की उम्र में ही उन्होंने अपना पहला इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर दिया था। अपने व्यवसायों से होने बाली आमदनी को बफे ने खर्च नहीं किया ,बल्कि 14 साल की उम्र में ही 40 एकड़ खेती की जमीन खरीद ली और इसे किराए पर उठाकर हर साल लाभ कमाने लगे। शेयर बाजार का अनुभव उन्हें बचपन में ही हो गया था। 
११ बर्ष की उम्र में बफे ने अपना पहला शेयर खरीदा। तब उन्होंने 38 डालर 
के भाव पर सिटीज सर्विस के तीन शेयर खरीदे थे। यह शेयर बाजार में उनका पहला कदम था। उस वक्त कौन जानता था की आगे चलकर वे शेयर बाजार में इतना नाम कमाएंगे और संसार के सबसे महान निबेशक़ माने जाएंगे। 
बारेन बफे के जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया ,जब वे कोलंबिया यूनिवर्सिटी में बेंजामिन ग्रैहम के शिष्य बने। बेंजामिन ग्रैहम शेयर बाजार  के प्रख्यात विशेषज्ञ थे। बे मूल्यगत निबेश नीति के प्रवर्तक थे। और वारेन बफे उनकी पुस्तक ' द इंटेलिजेंट इन्वेस्टर ' से बहुत प्रभावित थे। इस बारे में बफे का कहना है , ' खुशकिस्मती से मुझे हारवर्ड में दाखिला नहीं मिल पाया ,जिसका मतलब था की मुझे कोलंबिया में बेन ग्रैहम से पढ़ने का मौका मिल गया। जिससे मेरी जिंदगी बदल गई। सभी कुछ अच्छा हुआ इसलिए मुझे उम्मीद है की मेरी खुशकिस्मती का सिलसिला आगे भी चलता रहेगा। में 80 साल से खुशकिस्मत रहा हूँ । 

वारेन बफे जब विख्यात बेंजामिन ग्रैहम के शिष्य बने थे ,तो उनके मन में मूल्यगत निवेश करने का विचार आया। उनमे शेयर बाजार का ज्ञान था और बहुत से लोग उनसे सलाह लेने आया करते थे। एक दिन बफे के मन में एक विचार आया ,क्यों न पैसे वाले लोगो के साथ एक पार्टनरशिप की जाए। जिसके तहत उनके पैसे को बफे शेयर बाजार में लगाए और मुनाफा में हिस्सेदारी करे। इसमें लोग अपना पैसा बफे को दे देते थे और बफे अपनी चुनी हुई कंपनी में उनके पैसे का निवेश कर देते थे। 4 प्रतिशत से ज्यादा जितना भी लाभ होता था बफे उसमे से 25 प्रतिशत अपनी फीस के रूप में रख लेते थे और बाकी का मुनाफा पैसा लगाने वालो को दे देते थे। यह पार्टनरशिप पहले दोस्तों से शुरू हुई लेकिन बाद में अपरचित लोग भी बफे की निवेश कला से लाभ उठाने के लिए आने लगे। 

वारेन बफे कहते है , की में  कभी शेयर बाजार में पैसे कमाने की कोशिश नहीं करता हु। में कोई भी शेयर यह मानकर खरीदता हु की शेयर बाजार अगले दिन बंद हो जायेगा और पांच साल तक नहीं खुलेगा। 
दूरदर्शिता का यह सबक उन्हें बचपन में ही मिल गया था। ग्यारह साल की उम्र में उन्होंने एक कंपनी के तीन शेयर 38 डालर के भाव पर खरीद लिए ,लेकिन उसका भाव गिरकर 27 डालर तक आ गया। बाद में जब भाव बढ़कर 40 डालर हुआ तो बफे ने शेयर बेच दिए , जिससे उन्हें ब्रोकरेज के बाद 5 डालर का फायदा हुआ। लेकिन उसके बाद जो हुआ ,उसे वारेन बफे कभी नहीं भूल पाए। उसके बाद उस शेयर का भाव 200 डालर तक ऊपर गया। यह देख कर बफे बहुत पछताए। इस घटना से बफे ने दो बाते सीखी पहली यह की वे अच्छी कम्पनिया चुन सकते है और दूसरी यह की अच्छी कंपनियों के मामले में दूरगामी दृस्टिकोड ज्यादा लाभदायक होता है। दीर्घकालीन निवेश और दूरदर्शिता के कारण ही वारेन बफे को आज संसार का महानतम निबेशक़ कहा जाता है। 

****वारेन बफे सफलता के मंत्र ****

दूरदर्शिता रखे 
किफायत से चले 
मेहनत करे 
अँधेरे में तीर न चलाये 
सुरछित फासले की नीत अपनाएँ 



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