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Amazon.com के फाउंडर जेफ बेजोस  का जीवन परिचय | Jeff Bezos Biography.... 


एमेजॉन डॉट कॉम एक अमेरिकन मल्टीनेशनल ई -कॉमर्स कंपनी है ,जिसका मुख्यालय सिएटल ,वाशिंगटन में है।  यह विश्व की सबसे बड़ी ऑनलाइन रीटेल कंपनी है। कंपनी पुस्तकों की सबसे बड़ी ऑनलाइन विक्रेता है। ,किंडल ई -बुक रीडर का उत्पादन करती है। और क्लाउड कंप्यूटिंग सर्विसेस प्रदान करने में भी अग्रणी है। 
जेफ़ बेजोस ( जन्म 1964 ) इसके चेयरमैन और सीईओ है। 2011 में कंपनी की आमदनी 48.077 अरब डॉलर थी और मुनाफा 63 करोड़ डॉलर। यहाँ 65600 कर्मचारी काम करते है। 
एमेजॉन की सफलता के मंत्र क्या है ? आखिर इसके संस्थापक जेफ़ बेजोस ने ऐसा क्या किया की ऐमेजॉन संसार में सबसे बड़ी ऑनलाइन रीटेल कंपनी बन गई ? उन्हें ई -कॉमर्स का पितामह क्यों माना जाता है और उन्होंने एमेजॉन को इंटरनेट सेल्स के मॉडल के रूप में कैसे विकसित किया। ऐसा क्या हुआ की 3 कर्मचारियों से शुरू हुई कंपनी में आज 65000 से अधिक कर्मचारी काम करते है ? वे कौन से मंत्र थे ,जिन्हे पढ़कर वे संसार के 26 वे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए और आज उनके पास 18.4 अरब डॉलर की संपत्ति है. 

पूत के पाव पालने में दिख जाते है। यह कहावत बेजोस के जीवन पर पूरी तरह चरितार्थ होती है। ,क्योकि बचपन में बेजोस एक स्क्रूड्राईवर लेकर अपना पालना खोलने की कोशिश करते रहते थे।  जब वे थोड़े बड़े हुए ,तो बिजली के उपकरण में रूचि लेने लगे।  उनके भाई कमरे में बगैर जानकारी के न घुसे ,इसके लिए उन्होंने एक इलेक्ट्रिक अलार्म बनाया। जब बे चौथी कच्छा में थे , तो उनके स्कूल में मेनफ्रेम कंप्यूटर आया।  बेजोस भला यह अवसर कैसे छोड़ देते। चूंकि किसी टीचर को कंप्यूटर चलाना नहीं आता था ,इसलिए बेजोस और उनके साथियो ने मैन्युअल पढ़ -पढ़कर उसे चलाना सीखा। तब कौन जानता था की आगे चलकर वे कंप्यूटर पर ऑनलाइन रीटेल की क्रांति शुरू करने वाले है। 

कंप्यूटर साइंस के विशेषज्ञ जेफ़ बेजोस पढाई पूरी करके न्यूयॉर्क में फंड मैनेजर बन गए अप्रैल 1994 में एक दिन नेट सर्फिंग के दौरान उन्हें पता चला की बेव का उपयोग करने वालो की संख्या हर साल 2300 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। पलक झपकते ही उनके मन में विचार आया ,क्यों न ऑनलाइन बिजनेस शुरू किया जाए। इस विचार को साकार करने के लिए उन्होंने अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़ दी। यक़ीनन यह बहुत बड़ा जोखिम था। ख़ास तौर पर तब जब उनकी नई नई शादी हुई थी। अब सवाल यह था की नेट पर बेचा क्या जाए ? गहरे विचार मंथन के बाद ,अंततः बेजोस ने पुस्तको को चुना। ...... और बाकी इतिहास है। 

जेफ़ बेजोस ने जुलाई 1994 में अपनी कंपनी की स्थापना की और 1995 में इसकी वेबसाइट शुरू की। बेजोस पहले तो इसका नाम कैडेब्रा डॉट कॉम रखना चाहते थे ,लेकिन तीन महीने बाद उन्होंने इसका नाम बदलकर एमेजॉन डॉट कॉम कर दिया। उन्होंने संसार की सबसे बड़ी नदी एमेजॉन का नाम इसलिए चुना ,क्योकि वे संसार के सबसे बड़े ऑनलाइन बुकसेलर बनना चाहते थे।  उनकी वेबसाइट ऑनलाइन बुकस्टोरके रूप में शरू हुई ,लेकिन बाद में यंहा डीवीडी ,सीडी ,सॉफ्टवेयर ,वीडियो गेम ,इलेक्ट्रॉनिक्स ,कपडे ,फर्नीचर ,खिलोने और आभूषण  भी बिकने लगे। ऐमज़ॉन कंपनी एक गैरेज में शुरू हुई थी और वह भी केवल तीन कंप्यूटर से। ऑनलाइन बिक्री का सॉफ्टवेयर खुद बेजोस ने बनाया और तीन लाख डालर की शुरूआती पूँजी उनके माता -पिता ने लगाईं। कंपनी की स्थापना के वक़्त उनके पिता ने उनसे पहला सवाल यह पूछा था ,इंटरनेट क्या होता है। ?उनकी माँ ने बाद में कहा ,हम इंटरनेट पर दाव नहीं लगा रहे है। हम तो जेफ़ पर दाव लगा  रहे थे। माता -पिता का यह विश्वास शत -प्रतिशत सही साबित हुआ और एमेजॉन के 6 प्रतिशत शेयर के मालिक होने के कारण सन 2000 में माता -पिता अरबपति बन गए। 

एजुकेशन :

जब बेजोस नौकरी छोड़कर एमेजॉन शुरू करने के बारे में सोच रहे थे तब उन्होंने ' न्यूनतम पश्चाताप ' की नीति के आधार पर निर्णय लिया उन्होंने सोचा की 80 साल की उम्र में उन्हें नौकरी छोड़ने का अफ़सोस नहीं होगा ,लेकिन इस बात का अफ़सोस जरूर होगा की उन्होंने ऑनलाइन गोल्ड रश से फायदा नहीं उठाया। उन्होंने बाद में कहा , में जानता था की यदि में नाकाम हुआ तो मुझे उसका अफ़सोस नहीं होगा लेकिन में यह बात अच्छी तरह जानता था की कोशिश न करने का अफ़सोस हमेशा होगा। इसलिए उन्होंने कोशिश कर दी। .. और सफलता के शिखर पर पहुंच गए। 



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Warren Buffett Biography in hindi | वारेन बफे  का जीवन परिचय। .. 


' असाधारण परिणाम पाने के लिए असाधारण चीजे करना जरुरी नहीं है। '
- वारेन बफे 

वारेन बफे का जन्म 1930 में अमेरिका में हुआ था ,वारेन बफे ने बचपन में ही मेहनत और मितव्ययिता के सबक सीख लिए थे। वे बचपन से ही पैसे कमाने लगे थे। वे घर घर जाकर च्युंगम ,कोका -कोला और साप्ताहिक पत्रिकाएँ बेचते थे। कुछ समय तक उन्होंने अपने दादा जी के किराना स्टोर में भी काम किया। अखबार बांटने के अलावा वे सोडा पॉप बेचने और पिन बाल मशीन लगाने जैसे कई दूसरे धंधे भी करते थे। उनके व्यावसायिक प्रयत्नों से उन्हें नियमित आमदनी होती थी ,जिसका वे दुबारा निवेश करके नये व्यवसाय शुरू करते थे। हाईस्कूल में पढ़ते वक्त वांरेन बफे ने एक मित्र के साथ एक पिनबॉल मशीन खरीदी। उससे हुई कमाई से उन्होंने नई मशीन खरीदी और इस तरह उन्होंने आठ मशीने कर ली। जब उन्होंने अपना कारोबार बेचा ,तो मिलने वाले पैसो से उन्होंने नया बिजनेस शुरू किया। इस तरह 26 बर्ष की उम्र तक उन्होंने 174000 डॉलर इकट्ठे कर लिए थे। 
उल्लेखनी बात यह है की मात्र 14 बर्ष की उम्र में ही उन्होंने अपना पहला इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर दिया था। अपने व्यवसायों से होने बाली आमदनी को बफे ने खर्च नहीं किया ,बल्कि 14 साल की उम्र में ही 40 एकड़ खेती की जमीन खरीद ली और इसे किराए पर उठाकर हर साल लाभ कमाने लगे। शेयर बाजार का अनुभव उन्हें बचपन में ही हो गया था। 
११ बर्ष की उम्र में बफे ने अपना पहला शेयर खरीदा। तब उन्होंने 38 डालर 
के भाव पर सिटीज सर्विस के तीन शेयर खरीदे थे। यह शेयर बाजार में उनका पहला कदम था। उस वक्त कौन जानता था की आगे चलकर वे शेयर बाजार में इतना नाम कमाएंगे और संसार के सबसे महान निबेशक़ माने जाएंगे। 
बारेन बफे के जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया ,जब वे कोलंबिया यूनिवर्सिटी में बेंजामिन ग्रैहम के शिष्य बने। बेंजामिन ग्रैहम शेयर बाजार  के प्रख्यात विशेषज्ञ थे। बे मूल्यगत निबेश नीति के प्रवर्तक थे। और वारेन बफे उनकी पुस्तक ' द इंटेलिजेंट इन्वेस्टर ' से बहुत प्रभावित थे। इस बारे में बफे का कहना है , ' खुशकिस्मती से मुझे हारवर्ड में दाखिला नहीं मिल पाया ,जिसका मतलब था की मुझे कोलंबिया में बेन ग्रैहम से पढ़ने का मौका मिल गया। जिससे मेरी जिंदगी बदल गई। सभी कुछ अच्छा हुआ इसलिए मुझे उम्मीद है की मेरी खुशकिस्मती का सिलसिला आगे भी चलता रहेगा। में 80 साल से खुशकिस्मत रहा हूँ । 

वारेन बफे जब विख्यात बेंजामिन ग्रैहम के शिष्य बने थे ,तो उनके मन में मूल्यगत निवेश करने का विचार आया। उनमे शेयर बाजार का ज्ञान था और बहुत से लोग उनसे सलाह लेने आया करते थे। एक दिन बफे के मन में एक विचार आया ,क्यों न पैसे वाले लोगो के साथ एक पार्टनरशिप की जाए। जिसके तहत उनके पैसे को बफे शेयर बाजार में लगाए और मुनाफा में हिस्सेदारी करे। इसमें लोग अपना पैसा बफे को दे देते थे और बफे अपनी चुनी हुई कंपनी में उनके पैसे का निवेश कर देते थे। 4 प्रतिशत से ज्यादा जितना भी लाभ होता था बफे उसमे से 25 प्रतिशत अपनी फीस के रूप में रख लेते थे और बाकी का मुनाफा पैसा लगाने वालो को दे देते थे। यह पार्टनरशिप पहले दोस्तों से शुरू हुई लेकिन बाद में अपरचित लोग भी बफे की निवेश कला से लाभ उठाने के लिए आने लगे। 

वारेन बफे कहते है , की में  कभी शेयर बाजार में पैसे कमाने की कोशिश नहीं करता हु। में कोई भी शेयर यह मानकर खरीदता हु की शेयर बाजार अगले दिन बंद हो जायेगा और पांच साल तक नहीं खुलेगा। 
दूरदर्शिता का यह सबक उन्हें बचपन में ही मिल गया था। ग्यारह साल की उम्र में उन्होंने एक कंपनी के तीन शेयर 38 डालर के भाव पर खरीद लिए ,लेकिन उसका भाव गिरकर 27 डालर तक आ गया। बाद में जब भाव बढ़कर 40 डालर हुआ तो बफे ने शेयर बेच दिए , जिससे उन्हें ब्रोकरेज के बाद 5 डालर का फायदा हुआ। लेकिन उसके बाद जो हुआ ,उसे वारेन बफे कभी नहीं भूल पाए। उसके बाद उस शेयर का भाव 200 डालर तक ऊपर गया। यह देख कर बफे बहुत पछताए। इस घटना से बफे ने दो बाते सीखी पहली यह की वे अच्छी कम्पनिया चुन सकते है और दूसरी यह की अच्छी कंपनियों के मामले में दूरगामी दृस्टिकोड ज्यादा लाभदायक होता है। दीर्घकालीन निवेश और दूरदर्शिता के कारण ही वारेन बफे को आज संसार का महानतम निबेशक़ कहा जाता है। 


****वारेन बफे सफलता के मंत्र ****

दूरदर्शिता रखे 
किफायत से चले 
मेहनत करे 
अँधेरे में तीर न चलाये 
सुरछित फासले की नीत अपनाएँ 


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